राजस्थान

महापौर सौम्या गुर्जर की ‘कुर्सी’ पर फिर मंडराए काले बादल !

ग्रेटर नगर निगम के पूर्व आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव के साथ बदसलूकी मामले में महापौर सौम्या गुर्जर की ‘कुर्सी’ पर फिर काले बादल मंडराने लगे हैं!
दरअसल, न्यायिक जांच में महापौर समेत तीनों पार्षदों को दोषी माना गया है।
बता दें कि इस मामले में संयुक्त सचिव विधि प्रारूपण मुदिता भार्गव ने जांच की थी, इस जांच में महापौर सौम्या समेत पार्षद शंकर शर्मा, पारस जैन और अजय सिंह चौहान को दोषी माना गया है।

यह था मामला
दरअसल, जयपुर ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर और पार्षदों ने तत्कालीन कमिश्नर यज्ञमित्र देव सिंह पर बीवीजी कंपनी से सांठगांठ के आरोप लगाए थे।
जिसके बाद कमिश्नर से उनका विवाद हो गया,इस पर कमिश्नर ने ज्योति नगर थाने में मेयर पर अभद्र भाषा बोलने और पार्षद पारस जैन सहित कुछ पार्षदों पर मारपीट करने का आरोप लगाया था।
जिसके बाद यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने डीएलबी में पद स्थापित आरएएस अधिकारी रेणु खंडेलवाल को पूरे मामले की जांच सौंपी थी।
आरएएस अधिकारी रेणु खंडेलवाल की जांच के आधार पर 6 जून 2020 को स्वायत शासन विभाग ने देर रात महापौर सहित तीन पार्षदों को निलंबित कर दिया था।

अब सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर सौम्या गुर्जर और अन्य तीन पार्षदों को बर्खास्त करने के साथ ही छह महीने तक चुनाव लड़ने से वंचित कर सकती है।
हालांकि अब गेंद सरकार के पाले में है और वही सौम्या गुर्जर व अन्य तीन पार्षदों का भविष्य तय करेगी।

बदसलूकी मामले में राज्य सरकार ने दो साल पहले महापौर सौम्या गुर्जर व तीन पार्षदों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद सरकार ने शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बनाया था।
सरकार के निलंबन के आदेश के खिलाफ सौम्या ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
वहां से राहत मिलने के बाद इस साल 2 फरवरी को सौम्या गुर्जर ने एक बार फिर महापौर की कुर्सी संभाली थी।
अब न्यायिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनकी कुर्सी जा सकती है।

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