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हार्दिक पटेल ने कांग्रेस पार्टी से दीया इस्तीफ़ा !

गुजरात में कांग्रेस की राह अब और मुश्किल हो गई,हार्दिक पटेल ने कांग्रेस पार्टी से आज इस्तीफ़ा दे दिया डॉ रघु शर्मा के गुजरात प्रभारी की नियुक्ति से कांग्रेस में जान आ गई दिखती थी लेकिन विधानसभा चुनाव को अब कुछ ही महीने बचे हैं इस बीच हार्दिक पटेल का इस्तीफा कांग्रेस के लिए नई मुसीबत बन गया है।
हार्दिक पटेल और उनके समर्थक गुजरात के प्रभारी रघु शर्मा के व्यवहार से भी नाराज रहे। सूत्रों के अनुसार हार्दिक पटेल अब भाजपा में शामिल हो सकते हैं। यदि हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल होंगे तो यह कांग्रेस को दोहरा नुकसान होगा।
हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर आज ये जानकारी दी है!

उन्होंने ट्वीट किया है, “आज मैं हिम्मत करके कांग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा देता हूँ, मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी, मैं मानता हूं कि मेरे इस क़दम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा,”

हार्दिक पटेल लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से नाराज़ चल रहे थे, अप्रैल महीने में भी उन्होंने कांग्रेस को लेकर टिप्पणी की थी!
हार्दिक पटेल ने कहा था कि उनकी स्थिति पार्टी में उस नए दूल्हे जैसी है, जिसकी नसबंदी करा दी गई हो!

पार्टी पर उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए हार्दिक पटेल ने कहा था, “मुझे प्रदेश कांग्रेस कमिटी की किसी भी बैठक में नहीं बुलाया जाता, कोई निर्णय लेने से पहले वो मुझसे राय-मशविरा नहीं करते, तब इस पद का क्या मतलब है!”

हार्दिक पटेल ने कहा, “हाल ही में उन्होंने (कांग्रेस) राज्य में 75 नए महासचिव और 25 नए उपाध्यक्षों के नाम घोषित किए, क्या उन्होंने मुझसे एक बार भी पूछा कि हार्दिक भाई आपकी नज़र में कोई मज़बूत नेता इस सूची से ग़ायब तो नहीं है!”

अब डॉ. रघु शर्मा के सामने गुजरात में कांग्रेस में सैंधमारी को रोकने के साथ ही बिखराव को रोकना भी बड़ी चुनौती रहेगी!
मुख्यमंत्री गहलोत के प्रभारी रहते हुए पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में जबरदरस्त प्रदर्शन करते हुए 77 सीटों पर जीत पाई थी।
यह पिछले कई चुनावों में कांग्रेस का श्रेष्ठ प्रदर्शन था। लेकिन इसके बाद मानों कांग्रेस में जान ही नहीं रही हो। करीब एक दर्जन से ज्यादा विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। पार्टी को पहले विधानसभा उपचुनाव में हार मिली वहीं स्थानीय निकाय चुनाव में मुंह की खानी पड़ी।

पार्टी गुजरात में करीब ढाई दशक से सत्ता से दूर है, ऐेसे में लगातार हार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरना होगा!

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