राजस्थान

संसदीय सचिवों की नियुक्ति के लिए कैबिनेट पारित करेगी नए नियम!

मुख्यमंत्री सलाहकारो की नियुक्ति पर, राजभवन ने राठाैड़ के पत्र के आधार पर गहलोत सरकार से माँगा जवाब!

छह विधायकों की बतौर सीएम सलाहकार नियुक्ति हो जाने के बाद और संसदीय सचिवाें की सूची जारी हाेने से पहले ही विपक्ष की और से विरोध तेज हो गया है।
वहीं विवाद से बचने के लिए राजस्थान सरकार छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राजस्थान में भी संसदीय सचिव बनाए जाने के लिए सीएम अशोक गहलोत नए नियम बना रहे हैं।
विधि विभाग द्वारा संसदीय सचिवों के लिए तैयार नए नियमों के प्रस्ताव को सीएम गहलोत की पहली कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव रख कर उसे मंजूर कराया जाएगा।

भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठाैड़ ने साेमवार काे राज्यपाल कलराज मिश्र काे पत्र लिखकर नियुक्तियाें काे असंवैधानिक बताते हुए इसमें हस्तक्षेप की मांग की थी।

मंगलवार को राजभवन ने राठाैड़ के पत्र के आधार पर सीएम गहलोत सरकार से जवाब मांग लिया है।
राठौड़ ने पत्र में लिखा है कि संविधान के अनुच्छेद 191 (ए) के तहत विधानसभा में कानून बनाए बिना पोस्ट ऑफ प्रॉफिट के नाम पर ऐसी नियुक्ति नहीं हो सकती। उन्होंने पत्र में लिखा कि स्टेट लिस्ट में भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि सरकार अपने स्तर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार या संसदीय सचिवों की नियुक्ति करें।

सीएम गहलोत ने मंत्रिपरिषद की बैठक बुधवार शाम 4:00 बजे अपने सरकारी निवास पर बुला रखी है।
इस बैठक में सबसे अहम मुद्दा प्रदेश में 15 बनने वाले संसदीय सचिवों का प्रस्ताव ही है।
नियमों के बिना संसदीय सचिव बनाए जाना सीएम गलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

हाल ही में सीएम गहलोत 15 संसदीय सचिव नहीं बना सके।
भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने राज्यपाल कलराज मिश्र को एक पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई है और राज्यपाल से मांग की है कि वे सरकार को ऐसे अवैधानिक पदों पर विधायकों की नियुक्ति को रोके। राज्यपाल मिश्र ने भी भाजपा के इस शिकायत को आधार बनाकर सरकार से पूछा है कि किन नियमों के तहत संसदीय सचिव के साथ राजनीतिक सलाहकार विधायकों को बनाया जा रहा है।

मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के 2 दिन बाद भी संसदीय सचिवों की नियुक्ति नहीं होना सबसे बड़ा यही कारण बना हुआ है। सीएम गहलोत विधि विभाग और कानून के विशेषज्ञों के माध्यम से पूरे मामले बारीकी से अध्ययन कराया जा रहा है। यही नहीं सीएम गहलोत ने छत्तीसगढ़ द्वारा बनाए गए संसदीय सचिवों के नए नियमों का अध्ययन भी करवाया है उसी आधार पर अब नए नियम बनाने का प्रस्ताव तैयार करा लिया है और बुधवार की कैबिनेट की बैठक में उसे रखकर मंजूर कराया जाएगा।

कैबिनेट की बैठक में सरकार के 17 दिसंबर को होने वाले 3 साल पर जश्न मनाने और लोगों तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने के संबंध में कार योजना पर भी विचार का निर्णय किया जाएगा। प्रशासन शहरों की और गांव की ओर चल रहे अभियान को अधिक सक्रिय बनाने और प्रदेश के लोगों को इसका लाभ दिलाने के लिए भी अब मंत्रियों को विभिन्न जिलों का प्रभार सौंप कर वहां प्रवास पर रहने के कार्यक्रम भी घोषित किए जाएंगे।

संसदीय सचिवों की नियुक्ति में कानूनी विवाद से बचने के लिए कैबिनेट पारित करेगी नए नियम, विधि विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

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