स्वास्थ्य

स्तनों की सूजन में भुई-आंवला का उपयोग!

भुई आंवला एक जड़ी-बूटी है, आयुर्देव के अनुसार, भुई आंवला का इस्तेमाल चिकित्सा कार्यों में लोगों की अनेक बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
भुई आंवला का उपयोग सिर्फ रोगों को ठीक करने के लिए ही नहीं बल्कि से भूख और कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

भुई आंवला स्वाद में चरपरा, कसैला तथा मीठा होता है। यह अधिक प्यास लगने की परेशानी, खांसी, खुजली, कफ और बुखार आदि में तो फायदा पहुंचाता ही है साथ ही लिवर के किसी भी प्रकार के रोग की दिव्य औषधि भी माना जाता है।
अगर आप इसका लेप घाव पर करेंगे तो इससे घाव की सूजन तो ठीक होगी ही साथ ही घाव भी ठीक हो जाएगा। यह कुष्ठ रोग में भी उपयोगी होता है।

भुई आंवला क्या है
भुई आंवला के छोटे-छोटे पौधे वर्षाऋतु में उत्पन्न होते हैं। ये पौधे शरद्-ऋतु में फूलने-फलने के बाद गर्मी के मौसम में सूख जाते हैं।
इसके फल धात्रीफल की भांति गोल लेकिन आकार में छोटे होते हैं। इसी कारण इसको भूधात्री कहते हैं।
भुई आंवला कहां पाई या उगाई जाती है
भुई आंवला प्रायः आर्द्र स्थानों में खरपतवार के रूप में पैदा होता है। भारत में सभी स्थानों पर यह पाया जाता है। लगभग 900 मी की ऊंचाई तक इसके पौधे पाए जाते हैं।


भुई आंवला के औषधीय प्रयोग

स्तनों की सूजन में भुई-आंवला के प्रयोग से फायदा
स्तनों की सूजन को ठीक करने के लिए भी भुई आंवला बहुत काम आता है। भुई आंवला के पञ्चाङ्ग को पीसकर स्तन पर लेप करने से स्तनों की सूजन ठीक हो जाती है।
इसके अलावा भी भुई आंवला कई रोगों के इलाज में काम आती है!
श्वसनतंत्र विकार में उपयोगी भुई-आंवला का इस्तेमाल
श्वसन तंत्र संबंधी विकार को ठीक करने के लिए भुई आंवला बहुत फायदेमंद होता है।
भूम्यामलकी की 10 ग्राम जड़ को जल में पीसकर उसमें 1 चम्मच मिश्री या शहद मिलाएं। इसे पिलाने से और इसको नाक के रास्ते देने से श्वास रोग में लाभ होता है।

भुई आंवला के 50 ग्राम पञ्चाङ्ग को आधा लीटर जल के साथ औटाएं। जब यह एक चौथाई बच जाए तो इसे काढ़ा को एक-एक चम्मच दिन में दो बार पिलाने से श्वास रोग में लाभ होता है।

घाव सुखाने में फायदेमंद होता है भुई-आंवला का प्रयोग
भूम्यामल की रस को घाव में लगाने से घाव ठीक होता है। इसी तरह भूम्यामल की पञ्चाङ्ग को चावलों के पानी के साथ पीसकर घाव पर लगाने पर घाव की सूजन ठीक हो जाती है।
आमलकी के पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से भी घाव ठीक होता है। भुई-आंवला के कोमल पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है।

खुजली में लाभ पहुंचाता है भुई-आंवला का इस्तेमाल
भुई आंवला के पत्ते को पीसकर उसमें नमक मिलाकर खुजली पर लगाएं। खुजली ठीक हो जाती है।

भुई-आंवला के कोमल पत्तों को चोट पर लगाने से चोट की पीड़ा शांत हो जाती है। इसे जांघों की खुजली में भी लगाया जा सकता है।

भुई-आंवला के उपयोग से आंखों की बीमारी में लाभ
तांबे के बर्तन में भुई आंवला को सेंधा नमक के साथ जल में घिसें। इसे आंख के बाहर लेप करने से आंखों के रोग में लाभ होता है।

भुई-आंवला के इस्तेमाल से ठीक होती है मुंह के छाले की बीमारी
भूम्यामलकी के 50 ग्राम पत्तों का 200 मिली जल में हिम बनाएं। इससे कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।

भुई-आंवला दिलाता है खांसी से आराम
भुई आंवला के 50 ग्राम पञ्चाङ्ग को आधा लीटर जल में औटाएं। जब काढ़ा एक चौथाई रह जाता है तो काढ़ा को एक-एक चम्मच दिन में दो बार पिलाने से खांसी में लाभ होता है।

इसी तरह पिप्पली, लाल चन्दन, भुई आंवला सारिवा तथा अतीस आदि द्रव्यों से बनी घी का नियम से सेवन करने से भी खांसी की बीमारी में आराम मिलता है।

पेट के रोग में फायदेमंद भुई-आंवला का उपयोग
भुई आंवला के 20 ग्राम पत्तों को 200 मिली जल में उबालें। इसे छानकर थोड़ा-थोड़ा पीने से पेट दर्द से आराम मिलता है।
भुई आंवला की जड़ और पत्तों से बने ठंडे पदार्थ को लगभग 10-20 मिली मात्रा में दिन में दो बार लेने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
भुई आंवला के 50 ग्राम पञ्चाङ्ग को 400 मिली पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई हो जाए तो शेष काढ़ा को 10 मिली की मात्रा में दिन में तीन चार बार पिलाएं। इससे जलोदर में लाभ होता है।
त्रायमाणाद्य घृत में भूम्यामलकी को मिलाकर सेवन करने से पित्तज विकार के कारण होने वाली गांठ, रक्त विकार के कारण होने वाली गांठ में फायदा होता है।

आंतों के रोग में लाभ पहुंचाता है भुई आंवला का सेवन
छाया में सुखाए हुए भूमि आंवला को मोटा-मोटा कूटकर रख लें। 10 ग्राम भूम्यामलकी को 400 मिली पानी में पकाएं। जब एक चौथाई से भी कम रह जाए, तब छानकर सुबह खाली पेट और रात को भोजन से एक घण्टा पहले सेवन करें। यह आंतों में होने वाले घाव (अल्सर) को ठीक करने के लिए चमत्कारिक औषधि है।

सिर दर्द से आराम दिलाता है भुई-आंवला
सिर दर्द से आराम पाने के लिए घी में पिप्पली, लाल चन्दन, भुई आंवला, सारिवा तथा अतीस आदि द्रव्यों से मिलाएंं। इसका सेवन करें। इससे सिर दर्द ठीक हो जाता है।

बुखार में भुई-आंवला के इस्तेमाल से लाभ
भुई आंवला के कोमल पत्तों और काली मिर्च (चौथाई भाग) को पीसें। उनकी जायफल के बराबर गोलियां बना कर 2-2 गोली दिन में दो बार देें। इससे गंभीर ज्वर में तो लाभ होता ही है साथ ही बार-बार आने वाले गंभीर बुखार ठीक हो जाता है।

घी में पिप्पली, लाल चन्दन, भुई आंवला, सारिवा तथा अतीस आदि सामान पकाएं। इसका सेवन करने से बुखार में लाभ होता है।

बलादि घी में बला मूल, गोखरू, निम्ब, पर्पट, भूम्यामलकी तथा नागरमोथा को पकाएं। इसका सेवन करने से भी बुखार में लाभ होता है।

मूत्र रोग (पेशाब से जुड़ी बीमारी) में लाभ दिलाता है भुई-आंवला का सेवन
10 मिली भुई आंवला के रस में जीरा तथा चीनी मिलाकर पिलाने से पेशाब में जलन सहित अन्य मूत्र विकार ठीक होते हैं।

एक चम्मच भुई आंवला के पत्ते के रस में जीरा और चीनी मिलाकर देने से पेशाब की जलन की परेशानी में लाभ होता है।

10 मिली भुई आंवले के रस में 10 मिली गाय का घी मिलाएं। इसका सेवन करने से पेशाब के रुक-रुक कर आने की परेशानी में लाभ होता है। इसके 100 ग्राम पत्तों को 250 मिली दूध के साथ मसलकर पिलाने से मूत्र संबंधी विकार ठीक होते हैं।

भुई-आंवला के सेवन से दस्त को रोकने में मिलती है मदद
भुई आंवला के 50 ग्राम पञ्चाङ्ग को 400 मिली पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उसमें मेथी चूर्ण 5 ग्राम मिलाएं। इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से दस्त की गंभीर बीमारी में लाभ होता है।

भुई आंवला के 20 ग्राम पत्तों को 200 मिली जल में उबालें। इसे छानकर थोड़ा-थोड़ा पीने से आमातिसार में लाभ होता है।

सूजाक (गोनोरिया) रोग में फायदेमंद भुई-आंवला का प्रयोग
एक चम्मच भुई आंवला के पत्ते के रस में जीरा और चीनी मिलाकर देने से सुजाक में लाभ होता है।

20 मिली भुई आंवले के रस में 2 चम्मच घी मिलाकर सुबह और शाम देने से प्रमेह में लाभ होता है।

मासिक धर्म विकार में भुई-आंवला के इस्तेमाल से लाभ
पांच ग्राम बीज के चूर्ण को चावलों के धुए हुए पानी के साथ दो या तीन दिन पीने से मासिक धर्म में फायदा होता है। इससे मासिक धर्म के दौरान अधिक खून आना बंद हो जाता है। इसकी जड़ के चूर्ण को भी इसी प्रकार देने से लाभ होता है।

डायबिटीज में लाभदायक भुई-आंवला का उपयोग
15 ग्राम भुई आंवला पञ्चाङ्ग चूर्ण में 20 काली मिर्च चूर्ण मिलाएं। इसे दिन में दो तीन बार सेवन करने से डायबिटीज में लाभ होता है।

पीलिया में फायदेमंद भुई-आंवला का प्रयोग
भूआमलकी का पेस्ट बनाकर छाछ के साथ सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

भूधात्री की 5 ग्राम जड़ को पीस लें। इसे सुबह और शाम 250 मिली दूध के साथ खाली पेट लें। इससे पीलिया रोग में लाभ होता है।
कुष्ठ रोग में करें भुई-आंवला का इस्तेमाल
त्रायमाणाद्य घृत में भूम्यामलकी को मिलाकर सेवन करने से त्वचा रोग जैसे विसर्प और कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

टीबी की बीमारी में करें भुई-आंवला का सेवन
घी में पिप्पली, लाल चन्दन, भुई आंवला, सारिवा तथा अतीस आदि सामानों को मिलाकर पकाएं। इसका सेवन करने से टीबी की बीमारी में लाभ होता है।

लिवर रोग में फायदेमंद भुई आंवला का सेवन
छाया में सुखाए हुए भूमि आंवला को मोटा-मोटा कूटकर रख लें या इसके चूर्ण का इस्तेमाल करें। 10 ग्राम भूम्यामलकी को 400 मिली पानी में पकाएं। जब एक चौथाई से भी कम रह जाए, तब छानकर सुबह खाली पेट और रात को भोजन से एक घण्टा पहले सेवन करें। यह लिवर के दर्द जैसी परेशानी में लाभदायक होता ही है साथ ही पीलिया, शरीर के किसी भी अंग में होने वाले सूजन को भी ठीक करता है।

भुई-आंवला के सेवन से ह्रदय रोग में लाभ
त्रायमाणाद्य घृत में भूम्यामलकी को मिलाकर सेवन करने से ह्रदय रोग में लाभ होता है।

भुई आंवला के इस्तेमाल की मात्रा
भुई आंवला का इस्तेमाल इतनी मात्रा में कर सकते हैंः-

भुई आंवला का रस – 10-15 मिली
भुई आंवला चूर्ण – 3-6 ग्राम
भुई आंवला का काढ़ा – 10-30 मिली
अधिक लाभ लेने के लिए चिकित्सक के परामर्शानुसार प्रयोग करें।
भुई आंवला के इस्तेमाल का तरीका
भुई आंवला का इस्तेमाल इस तरह से किया जा सकता हैः-

भुई आंवला पञ्चाङ्ग
भुई आंवला के पर्ते
भुई आंवला की जड़

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