स्वास्थ्य

गंजेपन की समस्या में कमल से फायदा!

आमतौर पर कमल के फूल का प्रयोग पूजा-पाठ या घरों को सजाने आदि काम में ही किया जाता है, लेकिन सच यह है कि कमल के फूल का प्रयोग कर कई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं।
कमल का फूल कीचड़ में होता है, लेकिन आप यह नहीं जानते होंगे कि कमल के फूल का उपयोग एक औषधि के रूप में भी किया जाता है।
कमल के प्रयोग से रक्तपित्त, अत्यधिक प्यास लगने की समस्या, जलन, पेशाब संबंधित बीमारी, कफज दोष, बवासीर आदि में लाभ पा सकते हैं।
कमल कहां पाया या उगाया जाता है
यह भारत के सभी उष्ण प्रदेशों तथा हिमालय, कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, महाराष्ट्र में पाया जाता है। इसके साथ ही कमल दक्षिणी भारत में तालाबों एवं पंकयुक्त स्थानों पर भी पाया जाता है।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में कमल के फूल से संबंधित अनेक विशेषताएं बताई गई हैं।
आइए जानते हैं कि कमल के फूल से रोगों को कैसे ठीक कर सकते हैं।

कमल की तीन प्रजातियाँ होती हैं

कमल
इसके पत्ते चौड़े होते हैं जो थाली की तरह पानी में तैरते हुए दिखाई देते हैं। इसके फूल अत्यन्त सुन्दर व बड़े होते हैं। रंग-भेद के अनुसार कमल कई प्रकार होते हैं।

कुमुद
कुमुदनी का स्वरूप साधारणतया कमल के जैसा ही होता है; लेकिन इसके पत्ते कमल के पत्ते से छोटे, चमकीले, चिकने, जल की सतह पर तैरने वाले होते हैं। इसके फूल सफेद तथा 5-12 सेमी व्यास के होते हैं।

उत्पल (नीलकमल)
इसके पत्ते पानी की सतह पर तैरने वाले तथा इसके फूल नीले रंग के होते हैं।
गंजेपन की समस्या में कमल से फायदा

बराबर भाग में नीलकमल, बहेड़ा फल मज्जा, तिल, अश्वगंधा, अर्ध-भाग प्रियंगु के फूल (lotus flower) तथा सुपारी त्वचा को पीस लें। इसे सिर में लेप करने से गंजेपन की समस्या में लाभ होता है।
इसके अलावा भी कमल को कई औषधि मे काम में लिया जाता है जेसे :-

सफेद बालों की समस्या में कमल के प्रयोग से लाभ

उत्पल तथा दूध को मिला लें। इसे मिट्टी के बर्तन में 1 महीने तक जमीन में दबाकर रखें। इसे निकालकर बालों में लगाने से बाल स्वस्थ होते हैं तथा बालों का पकना कम होने लगता है।

रूसी हटाने के लिए करें कमल का उपयोग

नीलकमल के केशर को तिल तथा आँवले के साथ पीस लें। इसमें मुलेठी मिलाकर सिर में लेप करने से रूसी खत्म होती है।

आधासीसी (अर्धावभेदक या अर्धकपारी) में कमल के उपयोग से फायदा

अनन्तमूल, कूठ, मुलेठी, वच, पिप्पली और नीलकमल लें। इन 6 द्रव्यों को कांजी में पीसकर, थोड़ा एरण्ड तेल मिला लें। इसका लेप करने से आधासीसी या अधकपारी तथा सूर्य उगने के बाद होने वाले सिर के दर्द में लाभ मिलता है।

उल्टी रोकने के लिए करें कमल का प्रयोग

कमल के भुने हुए छिलका रहित बीजों को 1-2 ग्राम की मात्रा में लें। इसमें मधु मिलाकर सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है।

सिर दर्द में कमल का उपयोग लाभदायक

शतावरी, नीलकमल, दूब, काली तिल तथा पुनर्नवा लें। इन 5 द्रव्यों को जल में पीसकर लेप करने से सभी तरह के सिर दर्द में लाभ मिलता है।

आंखों की बीमारी में कमल के फूल से लाभ
कमल के फूल से दूध निकाल लें। इसे काजल की तरह आँखों में लगाने से आंखों के रोग ठीक होते हैं।

दांतों के रोग में कमल का इस्तेमाल लाभदायक

कमल की जड़ को चबाने से दांतों के कीड़े खत्म होते हैं।

कमल से खांसी का इलाज

1-2 ग्राम कमल की बीज के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त दोष के कारण होने वाली खांसी ठीक हो जाती है।

गुदाभ्रंश में कमल का उपयोग लाभदायक

कमल के 1-2 ग्राम पत्तों के चूर्ण में चीनी मिला लें। इसे खाने से गुदभ्रंश (गुदा का बाहर आना) में लाभ होता है!
सुबह-सुबह 2 ग्राम कमल की जड़ के पेस्ट को गाय के घी के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे गुदभ्रंश तथा इसकी वजह से होने वाले बुखार में लाभ मिलता है।

पेशाब में दर्द और जलन की समस्या को ठीक करता है कमल का उपयोग

कमल एवं नीलकमल से बने 10-20 मिली शीतकषाय (रात भर ठंडे पानी में रखने के बाद तैयार पदार्थ) या हिम में मधु एवं चीनी मिला लें। इसे पीने से पेशाब में दर्द और जलन की समस्या ठीक होती है।

तेल में पकाए हुए 2-4 ग्राम कमलकन्द को गाय के मूत्र के साथ सेवन करें। इससे पेशाब में दर्द की समस्या में लाभ होता है।

बुखार उतारने में कमल का उपयोग लाभदायक

कमल का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से बुखार में लाभ होता है।

बराबर भाग में उत्पल, अनार फल की छाल तथा कमल केसर चूर्ण (1-2 ग्राम) लें। इसे तण्डुलोदक (चावल के धोवन) के साथ सेवन करने से बुखार के साथ होने वाली दस्त में तुरंत लाभ होता है।

पेचिश में कमल के प्रयोग से लाभ
पित्तज दोष के कारण दस्त हो रही हो या पेचिश हो जाए तो बराबर भाग में कमल, नीलकमल, मंजिष्ठा तथा मोचरस लें। इन्हें 100 मिली बकरी के दूध में पका करें सेवन करें।
100 मिली बकरी के दूध में आधा भाग जल, 1-2 ग्राम सुंधबाला, 2-4 ग्राम नीलकमल, 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण और 5-10 मिली पृश्निपर्णी रस मिला लें। इससे दस्त पर रोक लगती है।
सफेद कमल केसर के पेस्ट में खाँड़, चीनी तथा मधु मिला लें। इसको चावल के धोवन के साथ सेवन करने से पेचिश ठीक होता है।
खूनी बवासीर में कमल का सेवन लाभदायक

चीनी तथा कमल के केसर को मिलाकर मक्खन के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

1-2 ग्राम कमल केशर में मिश्री मिलाकर खाने से योनि से रक्त निकलने की परेशानी और खूनी बवासीर में लाभ होता है।

गर्भपात रोकने में सहायता करता है कमल

बराबर भाग में चीनी, कमल नाल तथा तिल के 2-4 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से गर्भपात की संभावना कम हो जाती है।

गर्भधारण करने में मदद करता है कमल

कमल तथा कुमुद के 1-2 ग्राम पत्ते के पेस्ट में मधु एवं चीनी मिलाकर सेवन करने से गर्भपात नहीं होता है।
कमल एवं नील कमल की जड़ से बने 1-2 ग्राम पेस्ट में 1 ग्राम मुलेठी चूर्ण, 2 ग्राम चीनी तथा 1 ग्राम तिल मिला लें। इसका सेवन करने से गर्भपात नहीं होता है।
नीलकमल कन्द के 1-2 ग्राम चूर्ण में चीनी तथा मधु मिलाकर सेवन करने से गर्भपात के कारण होने वाला दर्द ठीक होता है।
दूसरे महीने होने वाले गर्भपात को रोकने के लिए कमल नाल को नागकेसर के साथ मिलाकर दूध के साथ दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।

योनि की बदबू आने की समस्या में कमल से लाभ
कमल-नाल, कमलगट्टा तथा उशीर को तेल में पकाएं। इसे योनि पर लेप करने से योनि से आने वाली बदबू और योनि के ढीलेपन की समस्या में लाभ होता है।

कमल के इस्तेमाल से दाद का इलाज

कमल की जड़ को पानी में पीसकर लेप करने से दाद, खुजली, कुष्ठ रोग और अन्य त्वचा रोगों में फायदा होता है।

त्वचा रोग में फायमेंद कमल का उपयोग

कमल के पौधे के पत्ते तथा बरगद के पत्तों को जलाकर उनकी भस्म बना लें। इसे तेल में पका लें। इसे लगाने से त्वचा रोगों में लाभ होता है।

नाक-कान से खून बहने (रक्तपित्त) की समस्या में कमल से फायदा

65 मिग्रा कमल पंचांग भस्म को पानी में घोल लें। इसे छानकर जो क्षारोदक मिलता है उसमें मधु मिलाकर पीने से रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या) में लाभ होता है।
कमलनाल के 1-2 ग्राम चूर्ण में बराबर भाग में लाल चंदन चूर्ण तथा चीनी मिला लें। इसे चावल के धोवन के साथ सेवन करने से या कमलनाल से बने शीतकषाय (10-20 मिली), रस (5-10 मिली), पेस्ट (1-2 ग्राम) अथवा काढ़ा (20-30 मिली) का सेवन करने से रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहने की समस्या) में लाभ होता है।
कमलकेशर के 1-2 ग्राम चूर्ण में मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से खून की उल्टी, थकान, सांसों के रोग, मुंह के सूखने की परेशानी, चक्कर आने की समस्या और अधिक प्यास लगने की समस्या ठीक होती है।
कमल फूल का रस या काढ़ा को 1-2 बूंद नाक में डालने से नकसीर (नाक से खून बहने की समस्या) में लाभ होता है।
बराबर भाग में नीलकमल, गैरिक, शंखभस्म तथा चंदन के पेस्ट में मिश्री युक्त जल मिला लें। इसे नाक में डालने से नाक से खून बहने के रोग (नकसीर) में लाभ होता है।
बराबर भाग में खस, लालकमल तथा नीलकमल को जल में भिगो लें। इसे अच्छी तरह घोल लें। इस जल में चीनी तथा मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तपित्त (नाक से खून बहने की बीमारी) जाता है।
लाल कमल (इनका केसर), उत्पल, पृश्निपर्णी तथा प्रियंगु को जल में पका लें। इसका पीने से रक्तपित्त (नाक से खून बहने की बीमारी) में लाभ होता है।
शरीर की जलन में फायदेमंद कमल के गुण

1-2 ग्राम कमल केशर को पीस लें। इसमें मधु मिलाकर खाने से शरीर की जलन खत्म हो जाती है।

सफेद कमल को पीसकर शरीर पर लेप करने से जलन से आराम मिलता है।

सांप के जहर को उतारने में मदद पहुंचाता है कमल

1-2 ग्राम कमल केशर को बराबर भाग में काली मिर्च के साथ पीस लें। इसे पिएं और सांप के काटे जाने वाले स्थान पर लगाएं। इससे सर्प के काटने से होने वाला दर्द, सूजन आदि में बहुत लाभ होता है।

कमल के उपयोगी भाग
पंचांग, फूल, फूल का केसर, जड़, बीज, फल

कमल के प्रयोग की मात्रा

कंद का रस – 10-20 मिलीॉ

बीज का चूर्ण 3-6 ग्राम।

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